08.09.2021

मिशन पहचान
 माध्यमिक शिक्षा परिषद उ0प्र0 द्वारा संचालित राजकीय /सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की वर्तमान दक्षता/ज्ञान को लेकर विभिन्न प्रकार की भ्रान्तियॉ परिलक्षित हो रही है, जिससे समाज में माध्यमिक शिक्षा के प्रति आम जनमानस में नाकारात्मक विचारों का उत्पन्न होना स्वभाविक है। सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति के वर्तमान दौर में अधिकतर लोग शिक्षित हुए हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पिछले 10 वर्षो में साक्षरता दर में वृद्धि यह दर्शाती है कि निश्चित ही शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति हुई है किन्तु शासकीय माध्यमिक विद्यालयों में साल दर साल गिरता हुआ नामांकन तथा बच्चों में अपेक्षित अधिगम स्तर का अभाव, चिन्ता का विषय रहा है। माध्यमिक विद्यालयों के निरीक्षण/अनुश्रवण के दौरान बच्चों में ज्ञान/दक्षता अपेक्षानुरूप नही होने के दृष्टिगत बच्चे का ज्ञान, गुरुजी की पहचान, अभियान की शुरूआत की गयी, जिसे मिशन पहचान  का नाम दिया गया है। 
माध्यमिक विद्यालयो में अध्ययनरत बच्चों, गुरुजन, एवं सम्मानित अभिभावकों की भागीदारी से माध्यमिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार करते हुए बच्चों व गुरुजन तथा उनके विद्यालयों को, उनकी पहचान दिलाना, मिशन पहचान का उद्देश्य है। वस्तुतः माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन, ठहरॉव एवं गुणवत्ता में अभिवृद्धि करना मिशन पहचान का प्राथमिक लक्ष्य है। 
विद्यार्थियों में, अपेक्षित ज्ञान का बोध/समझ, विकसित कर उनकी पहचान को स्थापित करना, अर्थात विद्यार्थियों को उनके कक्षा/स्तर के अनुरूप न्यूनतम ज्ञान कराकर, उनके आत्म विश्वास में वृद्धि करना ही मिशन पहचान है। 
मिशन पहचान, सीखनें/ज्ञान की One Way प्रक्रिया 
(गुरू ➡️ विद्यार्थी) नहीं है, बल्कि Learning By Intraction की प्रक्रिया (गुरू ↔️ विद्यार्थी) है। अभिव्यक्ति/सहभागिता से एक ओर जहॉ बच्चों में सीखने-समझने व रचने की नैसर्गिक क्षमताओं का विकास होता है, वही दूसरी ओर ब्लैकबोर्ड-किताब से ही ज्ञान प्रदान करने की परम्परागत एक मार्गीय, ऊर्जा व समयसाध्य विधा से गुरूजी को भी सहूलियत होती है, क्योंकि अभिव्यक्ति-संवाद-समूहपरिचर्चा, सदैव रोचक व उत्सावर्धक होते हैं बशर्ते गुरुजी सभी बच्चों को समान रूप से बोलने/अभिव्यक्ति व ब्लैकबोर्ड तक आने का अवसर प्रदान करें, सच होने की प्रथमतः अनिवार्य शर्त के बगैर .............। वस्तुतः बच्चों की अभिव्यक्ति/सहभागिता के बिना कोई भी सीखने-सीखाने की प्रक्रिया स्थायी व पोषणीय नहीं हो सकती है।
मिशन पहचान का क्रियान्वयन (Step by Step)
1-विद्यालयों में अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी को क्रमानुसार अपना सुविचार विद्यालय के चिन्हित बोर्ड/स्थान पर लिखने का अवसर प्रदान किया जाए, जिससे विद्यार्थी के आत्म विश्वास में वृद्धि होती। ब्लैक बोर्ड पर विद्यार्थी अपना विचार लिखकर अपना नाम व कक्षा भी अंकित करते हैं, यथा-
           आज का विचार
  परिश्रम सफलता की कुंजी है
                            रागिनी
                           कक्षा 6

यही विचार उस विद्यालय के लिए उस दिन का सुविचार होता है, जो अन्य विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच की क्षमता में वृद्धि करता है, जिससे ना केवल विद्यार्थी की स्वंय की पहचान बनती है, बल्कि उसके अभिभावक, गुरू व समुदाय मे भी आत्मविश्वास का संचार होता है। सुविचार लेखन, से बच्चो मे शुद्धवर्तनी एवं अभिव्यक्ति क्षमता का भी विकास होता है सुविचार लेखन में शुद्ध वर्तनी एवं अभिव्यक्ति क्षमता का भी विकास होता है। सभी विचारो को सुविचार पंजिका मे अंकित किया जाए एवं माह के अन्त मे उत्कृष्ट विचार वाले बच्चो को सम्मानित/प्रोत्साहित किया जाए। 
2- प्रार्थना सभा मे देश-दुनिया की समसामयिक घटनाओं/समस्याओं पर परिचर्चा किया जाए। क्रमानुसार प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा प्रार्थना सभा के पश्चात देश-दुनिया के समाचारों मे से 05 मुख्य खबर को ताजा खबर के रूप मे सुनाया जाएगा।
3- मिशन पहचान के अन्तर्गत प्रतिमाह, पाठयक्रम आधारित शिक्षण पद्धति में बच्चों ने क्या सीखा-समझा?, के आकलन हेतु विद्यालय स्तर पर मिशन पहचान मूल्यांकन टेस्ट का आयोजन माह के अन्त में होगा। विद्यालय स्तर पर आयोजित मिशन पहचान अधिगम मूल्यांकन टेस्ट में बच्चों की उपलब्धि/सम्प्राप्ति के आधार पर कक्षावार छात्रों को 05 श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा।
1- उत्कृष्ट।
2- अति उत्तम।
3- उत्तम।
4- संतोषजनक।
5- असंतोषजनक
मिशन पहचान मूल्यांकन टेस्ट में बच्चों को बहुविकल्पीय प्रश्न के साथ-साथ लघुउत्तरीय प्रश्न भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे बच्चे ओ0एम0आर0 शीट पर हल करेंगे/लिखेंगे, जिसे सम्बन्धित अध्यापक द्वारा मूल्यांकन करने के पश्चात, प्रत्येक छात्र का सम्प्राप्ति स्तर का निर्धारण/अभिलेखीकरण उपरोक्त दिये गये 05 श्रेणी के किसी एक में किया जाएगा। जिन बच्चों का शैक्षिक स्तर असंतोषजनक/संतोषजनक/उत्तम है, उनके उपलब्धि का आकलन कर उनके कमजोर पक्षो/विषय का चिन्हांकन कर कक्षा अध्यापक द्वारा शैक्षिक अनुसमर्थन प्रदान किया जाएगा, ताकि अगले माह होने वाले अधिगम मूल्यांकन में उनके सम्प्राप्ति स्तर में सकारात्मक वृद्धि हो सके एवं उनके श्रेणी में अपेक्षित सुधार हो सके। अधिगम मूल्यांकन की यह प्रक्रिया प्रत्येक माह सत्त रूप से आयोजित होगी। विद्यार्थियों के अधिगम स्तर के मूल्यांकन के आधार पर सम्मानित गुरुजन व उनके विद्यालयों का भी मूल्यांकन किया जाएगा, और उन्हें उत्कृष्ट, अतिउत्तम, उत्तम आदि की श्रेणियों में स्थापित किया जाएगा
4- सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के अगले चरण में विद्यालय प्रधानाचार्य/कक्षा अध्यापक द्वारा प्रत्येक विद्यार्थी के प्रगति का मूल्यांकन कर प्रत्येक कक्षा की अपेक्षित/सम्यक/विशिष्ट पहचान रखने वाले उत्कृष्ट विद्यार्थी का चयन किया जाएगा, जिसकी अपनी पहचान होगी अर्थात जो अपने स्तर/कक्षा के अनुसार अपेक्षित सम्प्राप्ति स्तर रखते हैं। तत्पश्चात प्रत्येक विद्यालय की पहचान बनाने वाले विद्यार्थीयों का ब्लाक स्तर पर मिशन पहचान के अन्तर्गत सतत् मूल्यांकन किया जाएगा। विकास खण्ड स्तर पर मिशन पहचान मूल्यांन टेस्ट में अपनी सम्यक/विशिष्ट पहचान रखने वाले कक्षा 06 से कक्षा 12 तक, प्रत्येक विकास खण्ड के लिए कुल 07 विद्यार्थी चयनित होते है, जो कक्षा के अनुसार उत्कृष्ट सम्प्राप्ति स्तर रखते है, जो अन्ततः उस ब्लाक की विशिष्ट पहचान बनते है, और अंत में सकारात्मक प्रतियोगिता/ प्रतिस्पर्धा, जो भाषा, गणित, विज्ञान, अंग्रेजी व सामान्य ज्ञान पर आधारित होती है, के माध्यम से जिला स्तर पर मिशन पहचान मूल्यांकन टेस्ट में विशिष्ट पहचान रखने वाले कक्षावार/स्तरवार उत्कृष्ट व अतिउत्तम बच्चों का चयन कर, उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर उनकी विशिष्ट पहचान को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही उनके अभिभावक व शिक्षकों का भी उपहार/प्रशस्ति पत्र के द्वारा सम्मान किया जाएगा, जो उनको विशिष्ट पहचान दिलाता है, जो अततः अभिभाक/गुरु/माध्यमिक शिक्षा विभाग की भी पहचान बनेगा । निश्चय ही बच्चे के ज्ञान से गुरु जी की पहचान भी स्थापित होगी। अस्तु मिशन पहचान ज्ञान की संवृद्धि की सतत् प्रक्रिया है, जो विद्यार्थी में आत्म विश्वास की वृद्धि कर उनमें अपेक्षित ज्ञान का बोध कराकर कक्षानुसार उनकी व गुरुजी की पहचान को स्थापित करेगा। 
मिशन पहचान को सफल बनाने हेतु आप सभी के सहयोग का आकांक्षी...
              ओ0 पी0 त्रिपाठी


बच्चे का ज्ञान गुरु जी की पहचान
बच्चों की मुस्कान मिशन पहचान
प्रधानाचार्य, समस्त राजकीय / अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों / वित्त विहीन विद्यालयों को अवगत कराना है कि----
1- विद्यालय पूर्ण साफ सफाई के साथ छिड़काव व सैनीटाइज कराकर प्रत्येक पाली में 50% उपस्थिति के साथ 16 अगस्त से खुलेंगे।
2- छात्र /छात्राओं को वाट्सएप के माध्यम से पूर्व ही अवगत कराया जाये कि उनको किस पाली में आना है, ताकि कोई अव्यवस्था न हो।
3- बैनर के साथ कोविड 19 हेल्प डेस्क की व्यवस्था की जाये।
4- थर्मल स्कैनर , आक्सीमीटर तथा सैनीटाइजर के साथ सबकी जॉच कराई जाये।
5- साबुन और पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जांच कर लें।
6- पर्याप्त मात्रा में मास्क की व्यवस्था की जाये।
7- पाली समाप्त होने के पश्चात कमरों को  सैनीटाइज कराया जाये।
8- शनिवार को स्कूल बंद रहेगा उस दिन पूरे स्कूल की साफ सफाई कराकर सैनीटाइज कराया जाये।
9- शौचालयों में पर्याप्त पानी की व्यवस्था की जाये तथा शौचालयों में फिनायल से धुलाई कराकर कुनैन की गोलियॉ रखी जाये।
10- बिजली पंखे वायरिंग की जांच करा लें तथा ओपेन स्वीच बोर्ड को बंद करा दें।
11- खेलकूद के मैदान में बरसात के कारण हुए गड्डों को बराबर कराकर दुरूस्त कर लें।
12- 21 अगस्त 2021 से महिला शक्ति अभियान के पूर्व महत्वपूर्ण नंबरो को वाल पेंटिंग कराकर दर्शाया जाये।
13- 15 अगस्त को सीमित / न्यून छात्रों को सम्मिलित कर समारोह मनाया जाये
14-कोविड 19 हेल्प डेस्क, साफ सफाई, सैनीटाइज व्यवस्था, शौचालय की धुलाई सफाई, मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, समस्त शिक्षक / कर्मचारी स्टाफ के 100% वैक्शीनेशन सुनिश्चित करे।
15. आप यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन शिक्षक कर्मचारी को विद्यालय आना allow कर रहे हैं उनका वैक्शीनेशन हो चुका हो और प्रमाण पत्र पत्रावली में संरक्षित हो।
                                  ओ पी त्रिपाठी 
26.05.2021

बच्चों का ज्ञान गुरुजी की पहचान
बच्चों की मुस्कान मिशन पहचान
उम्मीद है की जनपद के विद्यालयों के सम्मानित शिक्षकगण द्वारा बच्चों को कक्षानुरूप दक्षता दिलाने हेतु ऑनलाइन शिक्षण प्रारंभ कर दिया गया होगा....
ऑनलाइन शिक्षण को प्रभावी बनाने हेतु निम्न कार्यवाही अपेक्षित है...
* नए शैक्षिक सत्र में प्रोन्नत/नामांकित सभी बच्चों को ग्रुप से जोड़ा जाए..आवश्यकतानुसार बच्चों के अभिभावकों से संवाद कर उनका विश्वास प्राप्त किया जाए..क्योंकि जब तक अभिभावकों का भरोसा कायम नहीं होगा तब तक अपेक्षित समयबद्धता व सफलता नहीं मिलेगी
*ऑनलाइन शिक्षा के लिए कक्षा/अनुभागवार बने व्हाट्स एप ग्रुप में सबसे पहले ई-शिक्षा की विधि, प्रक्रिया, क्रिया प्रतिक्रिया का उद्देश्य बता दिया जाय साथ ही ग्रुप में विद्यालय परिवार अपना परिचय भी साझा करें
*विद्यालय की ही तरह शैक्षणिक वातावरण व अनुशासन बनाने के लिए आवश्यक है कि समय सारणी/ वादन चक्र(टाइम टेबल) बना लिया जाय ताकि शिक्षण हेतु  बच्चे तैयार होकर ससमय कॉपी, किताब, मोबाइल के साथ बैठे
*नव नियुक्त शिक्षकों को भी प्रशिक्षित कर अध्यापन की जिम्मेदारी दी जाए
शिक्षक वादन चक्र/लेसन प्लान के अनुसार नियत समय-सारणी पर ऑनलाइन कक्षा का संचालन करें
*शिक्षक द्वारा शिक्षण योजना(टीचिंग प्लान) द्वारा अध्यापन किया जाय जिसमे विषयवस्तु को सरल व रोचक ढंग से प्रस्तुत करने हेतु ऑडियो वीडियो तकनीक का प्रयोग किया जाए,जिसमें बच्चों की प्रतिभागिता हो क्योंकि बच्चों की सहभागिता के बिना सीखने सिखाने का कोई भी ज्ञान/विधा स्थाई नहीं हो सकती
*वादन चक्र एवं लेसन प्लान के अनुसार आनलाइन कक्षा में शिक्षक द्वारा बच्चो को कक्षावार काम दे और बच्चे से ऑनलाइन कक्षा में ही तय समय के अंदर जवाब मांगे ताकि ऑनलाइन शिक्षण में जीवंतता बनी रहे...फिर अगले वादन में ऑनलाइन कक्षा का संचालन सम्बन्धित विषय अध्यापक द्वारा किया जाए..फिर अगला वादन.. फिर अगला..जब एक वादन संचालित हो रहा हो तो उस अवधि में विषयान्तर पोस्ट कदापि ना डालें.. 
*जब कक्षा समाप्त हो जाए तो संबंधित शिक्षक द्वारा गृह कार्य(होम वर्क) भी दिया जाय और बच्चो से शाम तक व्हाट्स एप ग्रुप में हल मंगाया जाय...
प्रारम्भ में बच्चो को सरल, आनन्दायक व गतिविधि आधारित सामग्री दी जाए
*बच्चों को क्लास वार सामूहिक प्रश्न/काम (क्लास वर्क) भी दिया जाय और उनसे निर्धारित समय में प्रतिक्रिया/हल प्राप्त किया जाय
*बच्चे उत्तर देते समय कापी/कागज/मैसेज पर अपना नाम भी लिखे
*गुरु जी द्वारा जांच कर,  आनलाइन क्लास में ही,त्रुटियों को शुद्ध किया जाय और सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को शाबासी भी दी जाए
  मेरे द्वारा भी जनपद के किसी भी 4 से 5 विद्यालय के व्हाट्स एप ग्रुप से जुड़ कर गुरु जी द्वारा संचालित ऑनलाइन क्लास का अवलोकन किया जाएगा..
       कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
                   ओ पी त्रिपाठी
            जिला विद्यालय निरीक्षक
20.05.2021

बच्चों का ज्ञान गुरुजी की पहचान
बच्चों की मुस्कान मिशन पहचान
उम्मीद है की जनपद के विद्यालयों के सम्मानित शिक्षकगण द्वारा बच्चों को कक्षानुरूप दक्षता दिलाने हेतु ऑनलाइन शिक्षण प्रारंभ कर दिया गया होगा....
ऑनलाइन शिक्षण को प्रभावी बनाने हेतु निम्न कार्यवाही अपेक्षित है...
* नए शैक्षिक सत्र में प्रोन्नत/नामांकित सभी बच्चों को ग्रुप से जोड़ा जाए..आवश्यकतानुसार बच्चों के अभिभावकों से संवाद कर उनका विश्वास प्राप्त किया जाए..क्योंकि जब तक अभिभावकों का भरोसा कायम नहीं होगा तब तक अपेक्षित समयबद्धता व सफलता नहीं मिलेगी
*ऑनलाइन शिक्षा के लिए कक्षा/अनुभागवार बने व्हाट्स एप ग्रुप में सबसे पहले ई-शिक्षा की विधि, प्रक्रिया, क्रिया प्रतिक्रिया का उद्देश्य बता दिया जाय साथ ही ग्रुप में विद्यालय परिवार अपना परिचय भी साझा करें
*विद्यालय की ही तरह शैक्षणिक वातावरण व अनुशासन बनाने के लिए आवश्यक है कि समय सारणी/ वादन चक्र(टाइम टेबल) बना लिया जाय ताकि शिक्षण हेतु  बच्चे तैयार होकर ससमय कॉपी, किताब, मोबाइल के साथ बैठे
*नव नियुक्त शिक्षकों को भी प्रशिक्षित कर अध्यापन की जिम्मेदारी दी जाए
शिक्षक वादन चक्र/लेसन प्लान के अनुसार नियत समय-सारणी पर ऑनलाइन कक्षा का संचालन करें
*शिक्षक द्वारा शिक्षण योजना(टीचिंग प्लान) द्वारा अध्यापन किया जाय जिसमे विषयवस्तु को सरल व रोचक ढंग से प्रस्तुत करने हेतु ऑडियो वीडियो तकनीक का प्रयोग किया जाए,जिसमें बच्चों की प्रतिभागिता हो क्योंकि बच्चों की सहभागिता के बिना सीखने सिखाने का कोई भी ज्ञान/विधा स्थाई नहीं हो सकती
*वादन चक्र एवं लेसन प्लान के अनुसार आनलाइन कक्षा में शिक्षक द्वारा बच्चो को कक्षावार काम दे और बच्चे से ऑनलाइन कक्षा में ही तय समय के अंदर जवाब मांगे ताकि ऑनलाइन शिक्षण में जीवंतता बनी रहे...फिर अगले वादन में ऑनलाइन कक्षा का संचालन सम्बन्धित विषय अध्यापक द्वारा किया जाए..फिर अगला वादन.. फिर अगला..जब एक वादन संचालित हो रहा हो तो उस अवधि में विषयान्तर पोस्ट कदापि ना डालें.. 
*जब कक्षा समाप्त हो जाए तो संबंधित शिक्षक द्वारा गृह कार्य(होम वर्क) भी दिया जाय और बच्चो से शाम तक व्हाट्स एप ग्रुप में हल मंगाया जाय...
प्रारम्भ में बच्चो को सरल, आनन्दायक व गतिविधि आधारित सामग्री दी जाए
*बच्चों को क्लास वार सामूहिक प्रश्न/काम (क्लास वर्क) भी दिया जाय और उनसे निर्धारित समय में प्रतिक्रिया/हल प्राप्त किया जाय
*बच्चे उत्तर देते समय कापी/कागज/मैसेज पर अपना नाम भी लिखे
*गुरु जी द्वारा जांच कर,  आनलाइन क्लास में ही,त्रुटियों को शुद्ध किया जाय और सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को शाबासी भी दी जाए
  मेरे द्वारा भी जनपद के किसी भी 4 से 5 विद्यालय के व्हाट्स एप ग्रुप से जुड़ कर गुरु जी द्वारा संचालित ऑनलाइन क्लास का अवलोकन किया जाएगा..
       कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
                   ओ पी त्रिपाठी
            जिला विद्यालय निरीक्षक
21.05.2021

बच्चों का ज्ञान गुरुजी की पहचान
बच्चों की मुस्कान मिशन पहचान
उम्मीद है की जनपद के विद्यालयों के सम्मानित शिक्षकगण द्वारा बच्चों को कक्षानुरूप दक्षता दिलाने हेतु ऑनलाइन शिक्षण प्रारंभ कर दिया गया होगा....
ऑनलाइन शिक्षण को प्रभावी बनाने हेतु निम्न कार्यवाही अपेक्षित है...
* नए शैक्षिक सत्र में प्रोन्नत/नामांकित सभी बच्चों को ग्रुप से जोड़ा जाए..आवश्यकतानुसार बच्चों के अभिभावकों से संवाद कर उनका विश्वास प्राप्त किया जाए..क्योंकि जब तक अभिभावकों का भरोसा कायम नहीं होगा तब तक अपेक्षित समयबद्धता व सफलता नहीं मिलेगी
*ऑनलाइन शिक्षा के लिए कक्षा/अनुभागवार बने व्हाट्स एप ग्रुप में सबसे पहले ई-शिक्षा की विधि, प्रक्रिया, क्रिया प्रतिक्रिया का उद्देश्य बता दिया जाय साथ ही ग्रुप में विद्यालय परिवार अपना परिचय भी साझा करें
*विद्यालय की ही तरह शैक्षणिक वातावरण व अनुशासन बनाने के लिए आवश्यक है कि समय सारणी/ वादन चक्र(टाइम टेबल) बना लिया जाय ताकि शिक्षण हेतु  बच्चे तैयार होकर ससमय कॉपी, किताब, मोबाइल के साथ बैठे
*नव नियुक्त शिक्षकों को भी प्रशिक्षित कर अध्यापन की जिम्मेदारी दी जाए
शिक्षक वादन चक्र/लेसन प्लान के अनुसार नियत समय-सारणी पर ऑनलाइन कक्षा का संचालन करें
*शिक्षक द्वारा शिक्षण योजना(टीचिंग प्लान) द्वारा अध्यापन किया जाय जिसमे विषयवस्तु को सरल व रोचक ढंग से प्रस्तुत करने हेतु ऑडियो वीडियो तकनीक का प्रयोग किया जाए,जिसमें बच्चों की प्रतिभागिता हो क्योंकि बच्चों की सहभागिता के बिना सीखने सिखाने का कोई भी ज्ञान/विधा स्थाई नहीं हो सकती
*वादन चक्र एवं लेसन प्लान के अनुसार आनलाइन कक्षा में शिक्षक द्वारा बच्चो को कक्षावार काम दे और बच्चे से ऑनलाइन कक्षा में ही तय समय के अंदर जवाब मांगे ताकि ऑनलाइन शिक्षण में जीवंतता बनी रहे...फिर अगले वादन में ऑनलाइन कक्षा का संचालन सम्बन्धित विषय अध्यापक द्वारा किया जाए..फिर अगला वादन.. फिर अगला..जब एक वादन संचालित हो रहा हो तो उस अवधि में विषयान्तर पोस्ट कदापि ना डालें.. 
*जब कक्षा समाप्त हो जाए तो संबंधित शिक्षक द्वारा गृह कार्य(होम वर्क) भी दिया जाय और बच्चो से शाम तक व्हाट्स एप ग्रुप में हल मंगाया जाय...
प्रारम्भ में बच्चो को सरल, आनन्दायक व गतिविधि आधारित सामग्री दी जाए
*बच्चों को क्लास वार सामूहिक प्रश्न/काम (क्लास वर्क) भी दिया जाय और उनसे निर्धारित समय में प्रतिक्रिया/हल प्राप्त किया जाय
*बच्चे उत्तर देते समय कापी/कागज/मैसेज पर अपना नाम भी लिखे
*गुरु जी द्वारा जांच कर,  आनलाइन क्लास में ही,त्रुटियों को शुद्ध किया जाय और सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को शाबासी भी दी जाए
  मेरे द्वारा भी जनपद के किसी भी 4 से 5 विद्यालय के व्हाट्स एप ग्रुप से जुड़ कर गुरु जी द्वारा संचालित ऑनलाइन क्लास का अवलोकन किया जाएगा..
       कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
                   ओ पी त्रिपाठी
            जिला विद्यालय निरीक्षक
30.05.2020

नया सबेरा, नई रोशनी के साथ....
बच्चों की मुस्कान,मिशन पहचान
ऑनलाइन मिशन पहचान मूल्यांकन परीक्षा के लिए सभी विद्यार्थियों व अभिभावकों तथा पूरे बेसिक शिक्षा परिवार को मंगलकामना....💐
               🙏मिशन पहचान🙏
20.05.2020

बच्चों की मुस्कान,मिशन पहचान      
परिषदीय बच्चों की रुचि/मांग को देखते हुए पूर्व की भांति माह के अन्त तक निर्धारित पाठ्यक्रम के सापेक्ष बच्चों के अधिगम स्तर के आकलन के लिए मिशन पहचान मूल्यांकन परीक्षा का आयोजन 30 मई 2020 को, विद्यालय स्तर पर बने ह्वाटसप ग्रुप के द्वारा ई-पाठशाला में कराया जाएगा, पूर्व की भांति प्रश्न का 80 प्रतिशत भाग पुनरावलोकन/पुनरावृत्ति से तथा शेष भाग चालू माह के पाठ्यक्रम से लिया जा सकता है..
बच्चों को ई पाठशाला में कक्षा वार पाठ्यक्रम और सामान्य ज्ञान आधारित कक्षा 2 के लिए 25 और कक्षा 3 से 8 के लिए 50 बहुविकल्पीय व अतिलघु उत्तरीय प्रश्न के सेट दिए जाएंगे, जिसमें 10  प्रतिशत प्रश्न, अति लघु उत्तरीय हो, जिसका उत्तर बच्चों द्वारा पांच-छः लाइन में लिख कर दिया जाएगा....
प्रश्नपत्रों का निर्माण विद्यालय स्तरीय टीम मिशन पहचान द्वारा किया जाएगा जिसकी शुचिता और गोपनीयता का उत्तरदायित्व विद्यालय स्टाफ का होगा..
नियत समय पर परीक्षा समाप्ति के पश्चात ई पाठशाला में ही बच्चों से हल (प्रश्न संख्या के साथ उसका सही विकल्प A/B/C/D) मंगाकर उनका मूल्यांकन कर, शाबाशी/ प्रोत्साहन दिया जाय। नियत समय पर ही बच्चों द्वारा अपना हल ई पाठशाला में भेजा जाएगा भले ही बच्चे ने परीक्षा समाप्ति से पहले ही प्रश्नों को हल कर लिया हो... मूल्यांकन के बाद सभी प्रश्नों के उत्तर ई-पाठशाला में बच्चों से साझा किया जाय | जिन प्रश्नों का उत्तर बच्चे नहीं दे पाए या गलत दिए है, उन्हें बच्चों को फिर से समझाया जाय......
ऑनलइन परीक्षा के कुशल आयोजन हेतु विद्यालयों को नेतृत्व प्रदान करने में एस आर जी/ए आर पी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी...
 मिशन पहचान मूल्यांकन परीक्षा के  अनुसमर्थन/अनुश्रवण के लिए प्रत्येक srg/arp, कम से कम दस दस विद्यालयों के व्हाट्स एप ग्रुप/ई पाठशाला से जुड़े रहेंगे,इस प्रकार कुल 300 विद्यालयों की मॉनिटरिंग हो सकेगी..
इसी प्रकार सभी खण्ड शिक्षा अधिकारी भी विधालय स्तरीय दस दस ई पाठशाला का अनुश्रवण किया जाएगा और कुल 80 विद्यालयों की मॉनिटरिंग होगी....
इसी क्रम में जिला समन्वयक एस एस ए और बेसिक स्टाफ द्वारा कुल 200 विद्यालयों की मॉनिटरिंग होगी....
जिला समन्वयक, प्रशिक्षण व एस आर जी की संयुक्त जिम्मेदारी होगी कि उपर्युक्त के अनुसार कार्ययोजना प्रस्तुत करें..
नए परिवेश में नए जोश व उमंग के साथ..
               🙏मिशन पहचान🙏
08.05.2020

बच्चों की मुस्कान,मिशन पहचान      
परिषदीय बच्चों की रुचि/मांग को देखते हुए पूर्व की भांति माह के अन्त तक निर्धारित पाठ्यक्रम के सापेक्ष बच्चों के अधिगम स्तर के आकलन के लिए मिशन पहचान मूल्यांकन परीक्षा का आयोजन मई 2020 के अंतिम कार्य दिवस को, विद्यालय स्तर पर बने ह्वाटसप ग्रुप के द्वारा ई-पाठशाला में कराया जाना प्रस्तावित है, यथासंभव पूर्व की भांति प्रश्न का 80 प्रतिशत भाग पुनरावलोकन/पुनरावृत्ति से तथा शेष भाग चालू माह तक के पाठ्यक्रम से लिया जा सकता है..
बच्चों को ई पाठशाला में कक्षा वार पाठ्यक्रम और सामान्य ज्ञान आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न के सेट दिए जाएंगे, जिसमें 10  प्रतिशत प्रश्न, अति लघु उत्तरीय हो, जिसका उत्तर बच्चों द्वारा पांच-छः लाइन में लिख कर दिया जाएगा |
नियत समय पर परीक्षा समाप्ति के पश्चात ई पाठशाला में ही बच्चों से हल (प्रश्न संख्या के साथ उसका सही विकल्प A/B/C/D) मंगाकर उनका मूल्यांकन कर, शाबाशी/ प्रोत्साहन दिया जाय और परीक्षा में सम्मिलित सभी बच्चों का नाम और प्राप्तांक ई पाठशाला में शेयर किया जाए। परीक्षा की अवधि पूर्ण होने पर ही बच्चों द्वारा अपना हल/उत्तर ई पाठशाला में प्रेषित/पोस्ट किया जाएगा भले ही उसने प्रश्नों को परीक्षा समाप्ति से पूर्व हल कर लिया हो...  मूल्यांकन के बाद सभी प्रश्नों के उत्तर ई-पाठशाला में बच्चों से साझा किया जाय | जिन प्रश्नों का उत्तर बच्चे नहीं दे पाए या गलत दिए है, उन्हें बच्चों को फिर से समझाया जाय......
ऑनलइन परीक्षा के कुशल आयोजन हेतु विद्यालयों को, नेतृत्व प्रदान करने में, एस आर जी/ए आर पी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी...
निर्धारित तिथि को मिशन पहचान मूल्यांकन परीक्षा के  अनुसमर्थन/अनुश्रवण के लिए प्रत्येक srg/arp, कम से कम दस दस विद्यालयों के व्हाट्स एप ग्रुप/ई पाठशाला से जुड़े रहेंगे,इस प्रकार कुल 300 विद्यालयों की मॉनिटरिंग हो सकेगी..
इसी प्रकार सभी खण्ड शिक्षा अधिकारी भी विधालय स्तरीय दस दस ई पाठशाला का अनुश्रवण किया जाएगा और कुल 80 विद्यालयों की मॉनिटरिंग होगी....
इसी क्रम में जिला समन्वयक एस एस ए और बेसिक स्टाफ द्वारा कुल 200 विद्यालयों की मॉनिटरिंग होगी....
जिला समन्वयक, प्रशिक्षण व एस आर जी की संयुक्त जिम्मेदारी होगी कि उपर्युक्त के अनुसार कार्ययोजना प्रस्तुत करें..
नए परिवेश में नए जोश व उमंग के साथ..
बच्चे का ज्ञान, गुरुजी की पहचान
               🙏मिशन पहचान🙏
18-04-2020

को-कोई,रो-रोड पर,ना-निकले
जनपद में विभिन्न विद्यालयों ई पाठशाला के लिए संचालित व्हाट्स एप ग्रुप में जुड़ने के बाद प्राप्त अनुभव के आधार पर ई पाठशाला को सफल बनाने हेतु तत्काल निम्न कार्यवाही अपेक्षित है -
अभिभावकों और बच्चो को फोन कर उनसे बात किया जाय... जब तक अभिभावकों का भरोसा कायम नहीं होगा तब तक सफलता नहीं मिलेगी क्योंकि परिषदीय बच्चो की उम्र व परिस्थिति ऐसी नहीं, कि वे स्वयं निर्णय कर ले
*ऑनलाइन शिक्षा के लिए बने व्हाट्स एप ग्रुप में सबसे पहले ई-शिक्षा की विधि, प्रक्रिया, क्रिया प्रतिक्रिया का उद्देश्य बता दिया जाय साथ ही विद्यालय परिवार अपना परिचय भी ग्रुप में साझा करे जिससे अभिभावकों का विश्वास हासिल किया जा सकेगा
*शासन व विभाग द्वारा ई पाठशाला के लिए टीवी एवं रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रम को नियमित रूप से देखने/सुनने के लिए बच्चो को प्रेरित किया जाय
*बच्चो के लिए एक समय तय कर दिया जब बच्चे तैयार होकर कॉपी कलम के साथ मोबाइल के साथ बैठे
सामान्य ज्ञान के साथ साथ सभी शिक्षक वादन चक्र/लेसन प्लान के अनुसार नियत समय-सारणी पर ई पाठशाला का संचालन करें...वादन चक्र एवं लेसन प्लान के अनुसार आनलाइन कक्षा में बच्चो को कक्षावार काम दे और बच्चे से ऑनलाइन कक्षा में ही तय समय के अंदर जवाब मांगे...फिर अगले वादन में ऑनलाइन कक्षा का संचालन वादानानुसर सम्बन्धित विषय अध्यापक द्वारा किया जाए..फिर अगला वादन.. फिर अगला..जब एक वादन संचालित हो रहा हो तो उस अवधि में विषयान्तर पोस्ट ना डालें.. 
जब सभी की कक्षाएं समाप्त हो जाएं तो गृह कार्य भी दिया जाय और बच्चो से शाम तक हल मंगाया जाय*...
प्रारम्भ में बच्चो को सरल, आनन्दायक व गतिविधि आधारित सामग्री दी जाए
ई पाठशाला में बिना सोचे समझे अंधाधुंध सामग्रियों के पोस्ट करने से बचें यह जरूरी नहीं कि जो अन्य के लिए सही हो आप के बच्चो के लिए भी प्रासंगिक हो अर्थात पहले आकलन करें और याथासंशोधन जो बच्चो के स्तर/कक्षा के अनुरूप हो उसी का प्रयोग करे ताकि आपकी मौलिकता और पहचान बनी रहे
*बच्चे उत्तर देते समय कापी/कागज/मैसेज पर अपना नाम भी लिखे
* गुरु जी द्वारा जांच कर,  आनलाइन क्लास में ही, त्रुटियो को शुद्ध किया जाय और सही उत्तर देने वालो को शाबाशी भी दी जाय
*ऑनलाइन क्लास का टाइम समाप्त होने पर गृहकार्य दिया जाय जिनका हल उसी दिन बच्चों से रात तक मांग लिया जाए जिस पर अगले दिन क्लास में चर्चा किया जा सके
*बच्चों की प्रतिभागिता बढा़यी जाए, सभी बच्चों को ग्रुप में जोड़ने का प्रयास किया जाए..
*अभिभावक एवं बच्चों को कोरोनावायरस के दुष्प्रभाव से बचाव की सिर्फ अधिकृत सूचना दी जा सकती है
       कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
            म‌ऊ है तो मुमकिन है
20.05.2021

बच्चों का ज्ञान गुरुजी की पहचान
बच्चों की मुस्कान मिशन पहचान
उम्मीद है की जनपद के विद्यालयों के सम्मानित शिक्षकगण द्वारा बच्चों को कक्षानुरूप दक्षता दिलाने हेतु ऑनलाइन शिक्षण प्रारंभ कर दिया गया होगा....
ऑनलाइन शिक्षण को प्रभावी बनाने हेतु निम्न कार्यवाही अपेक्षित है...
* नए शैक्षिक सत्र में प्रोन्नत/नामांकित सभी बच्चों को ग्रुप से जोड़ा जाए..आवश्यकतानुसार बच्चों के अभिभावकों से संवाद कर उनका विश्वास प्राप्त किया जाए..क्योंकि जब तक अभिभावकों का भरोसा कायम नहीं होगा तब तक अपेक्षित समयबद्धता व सफलता नहीं मिलेगी
*ऑनलाइन शिक्षा के लिए कक्षा/अनुभागवार बने व्हाट्स एप ग्रुप में सबसे पहले ई-शिक्षा की विधि, प्रक्रिया, क्रिया प्रतिक्रिया का उद्देश्य बता दिया जाय साथ ही ग्रुप में विद्यालय परिवार अपना परिचय भी साझा करें
*विद्यालय की ही तरह शैक्षणिक वातावरण व अनुशासन बनाने के लिए आवश्यक है कि समय सारणी/ वादन चक्र(टाइम टेबल) बना लिया जाय ताकि शिक्षण हेतु  बच्चे तैयार होकर ससमय कॉपी, किताब, मोबाइल के साथ बैठे
*नव नियुक्त शिक्षकों को भी प्रशिक्षित कर अध्यापन की जिम्मेदारी दी जाए
शिक्षक वादन चक्र/लेसन प्लान के अनुसार नियत समय-सारणी पर ऑनलाइन कक्षा का संचालन करें
*शिक्षक द्वारा शिक्षण योजना(टीचिंग प्लान) द्वारा अध्यापन किया जाय जिसमे विषयवस्तु को सरल व रोचक ढंग से प्रस्तुत करने हेतु ऑडियो वीडियो तकनीक का प्रयोग किया जाए,जिसमें बच्चों की प्रतिभागिता हो क्योंकि बच्चों की सहभागिता के बिना सीखने सिखाने का कोई भी ज्ञान/विधा स्थाई नहीं हो सकती
*वादन चक्र एवं लेसन प्लान के अनुसार आनलाइन कक्षा में शिक्षक द्वारा बच्चो को कक्षावार काम दे और बच्चे से ऑनलाइन कक्षा में ही तय समय के अंदर जवाब मांगे ताकि ऑनलाइन शिक्षण में जीवंतता बनी रहे...फिर अगले वादन में ऑनलाइन कक्षा का संचालन सम्बन्धित विषय अध्यापक द्वारा किया जाए..फिर अगला वादन.. फिर अगला..जब एक वादन संचालित हो रहा हो तो उस अवधि में विषयान्तर पोस्ट कदापि ना डालें.. 
*जब कक्षा समाप्त हो जाए तो संबंधित शिक्षक द्वारा गृह कार्य(होम वर्क) भी दिया जाय और बच्चो से शाम तक व्हाट्स एप ग्रुप में हल मंगाया जाय...
प्रारम्भ में बच्चो को सरल, आनन्दायक व गतिविधि आधारित सामग्री दी जाए
*बच्चों को क्लास वार सामूहिक प्रश्न/काम (क्लास वर्क) भी दिया जाय और उनसे निर्धारित समय में प्रतिक्रिया/हल प्राप्त किया जाय
*बच्चे उत्तर देते समय कापी/कागज/मैसेज पर अपना नाम भी लिखे
*गुरु जी द्वारा जांच कर,  आनलाइन क्लास में ही,त्रुटियों को शुद्ध किया जाय और सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को शाबासी भी दी जाए
  मेरे द्वारा भी जनपद के किसी भी 4 से 5 विद्यालय के व्हाट्स एप ग्रुप से जुड़ कर गुरु जी द्वारा संचालित ऑनलाइन क्लास का अवलोकन किया जाएगा..
       कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
                   ओ पी त्रिपाठी
            जिला विद्यालय निरीक्षक

2020-04-18 00:00:00

को-कोई,रो-रोड पर,ना-ना निकले
बच्चे का ज्ञान, गुरु जी की पहचान
ऑनलाइन शिक्षा हेतु बने विद्यालयों के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के बाद अनुभव आधारित निम्न सुझाव है - 
*ऑनलाइन शिक्षा के लिए बने व्हाट्स एप ग्रुप में सबसे पहले ई-शिक्षा की विधि, प्रक्रिया, क्रिया प्रतिक्रिया का उद्देश्य बता दिया जाय साथ ही विद्यालय परिवार अपना परिचय भी ग्रुप में साझा करे जिससे अभिभावकों का विश्वास हासिल किया जा सके
*बच्चो के लिए एक समय तय कर दिया जब बच्चे तैयार होकर कॉपी कलम के साथ मोबाइल के साथ बैठे
*यथासम्भव लेसन प्लान तैयार कर पढ़ाया जाए
*प्रारम्भ में बच्चो को सरल, आनन्दायक व गतिविधि आधारित सामग्री दी जाए
*बच्चो को क्लास वार सामूहिक प्रश्न/काम दिया जाय और उनसे निर्धारित समय में प्रतिक्रिया/हल प्राप्त किया जाय
*बच्चे उत्तर देते समय कापी/कागज/मैसेज पर अपना नाम भी लिखे
* गुरु जी द्वारा जांच कर,  आनलाइन क्लास में ही, त्रुटियो को शुद्ध किया जाय और सही उत्तर देने वालो को शाबाशी भी दी जाय
*ऑनलाइन क्लास का टाइम समाप्त होने पर गृहकार्य दिया जाय जिनका हल उसी दिन बच्चों से रात तक मांग लिया जाए जिस पर अगले दिन क्लास में चर्चा किया जा सके
*बच्चों की प्रतिभागिता बढा़यी जाए, सभी बच्चों को ग्रुप में जोड़ने का प्रयास किया जाए..
*अभिभावक एवं बच्चों को कोरोनावायरस के दुष्प्रभाव से बचाव की सिर्फ अधिकृत सूचना दी जा सकती है
            म‌ऊ है तो मुमकिन है
             🙏ओ पी त्रिपाठी🙏